(1952 से 2023 तक)
1952
रामलाल रघुनाथ चन्द्रक
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC)
मध्य प्रदेश की पहली विधानसभा में कांग्रेस का दबदबा।
1957
नत्थूलाल
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC)
कांग्रेस ने लगातार जीत हासिल की।
1962
नत्थूलाल
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC)
नत्थूलाल की दूसरी बार जीत
1967
ठाकुरदास
भारतीय जनसंघ (BJS)
जनसंघ (BJP का पूर्ववर्ती) ने पहली बार वारासिवनी में जीत दर्ज की।
1972
ठाकुरदास
भारतीय जनसंघ (BJS)
जनसंघ की लगातार जीत।
1977
के.डी. देशमुख (बाठू)
जनता पार्टी (JP)
जनता पार्टी की राष्ट्रीय लहर में जीत। कुल 43,791 वोटों में से 19,428 वोट मिले।
1980
के.डी. देशमुख
जनता पार्टी (JP)
47,319 वोटों में से 22,136 वोट मिले।
1985
के.डी. देशमुख
जनता पार्टी (JNP)
59,892 वोटों में से 29,297 वोट मिले।
1990
उत्तम चंद लुणावत
भारतीय जनता पार्टी (BJP)
BJP ने जीत हासिल की
1993
श्यामलाल श्याम
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC)
कांग्रेस की वापसी।
1998
के.डी. देशमुख
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC)
75,295 वोटों में से 29,241 वोट मिले।
2003
प्रदीप अमृतलाल जायसवाल (गुड्डा)
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC)
प्रदीप जायसवाल की पहली जीत।
2008
प्रदीप अमृतलाल जायसवाल (गुड्डा)
म्मीदवार के रूप में जीत, 88,000+ वोटों में से जीत।
2013
डॉ. योगेंद्र निर्मल
भारतीय जनता पार्टी (BJP)
BJP की जीत, मध्य प्रदेश में BJP की मजबूत लहर।
2018
प्रदीप अमृतलाल जायसवाल (गुड्डा)
निर्दलीय (Independent)
दूसरी बार निर्दलीय जीत, कांग्रेस और BJP को हराया।
2023
विवेक "विक्की" पटेल
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC)
1,003 वोटों के अंतर से BJP के प्रदीप जायसवाल को हराया
महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ
कांग्रेस और BJP का प्रभाव:
आजादी के बाद शुरुआती दशकों में कांग्रेस का वारासिवनी में दबदबा रहा, विशेष रूप से 1950 और 1960 के दशक में।
1967 से जनसंघ (BJP का पूर्ववर्ती) ने अपनी उपस्थिति दर्ज की, और बाद में BJP ने कई बार जीत हासिल की।
निर्दलीय उम्मीदवारों की ताकत:
प्रदीप अमृतलाल जायसवाल (गुड्डा) ने 2008 और 2018 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की, जो उनकी स्थानीय लोकप्रियता और प्रभाव को दर्शाता है। 2023 में वे BJP के टिकट पर लड़े, लेकिन हार गए।
के.डी. देशमुख का योगदान:
के.डी. देशमुख (बाठू) ने 1977, 1980, 1985, और 1998 में अलग-अलग पार्टियों (जनता पार्टी और कांग्रेस) से जीत हासिल की। वे वारासिवनी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक रहे।
स्वतंत्रता संग्राम का प्रभाव:
वारासिवनी को "स्वतंत्रता सेनानियों का शहर" कहा जाता है। यहाँ के कई नेता, जैसे कस्तूरचंद वर्मा और हीरालाल ताम्रकार, स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय थे, जिसने क्षेत्र की राजनीतिक चेतना को मजबूत किया। इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि ने स्थानीय नेतृत्व को प्रभावित किया।
हाल के रुझान:
2023 में विवेक "विक्की" पटेल की जीत ने कांग्रेस की वापसी को दर्शाया। यह चुनाव कड़ा था, जिसमें केवल 1,003 वोटों का अंतर रहा।